पांच प्रकार की वरदानी सेवकाईयां
‘‘प्रभु येशुआ ने कितनों को प्रेरित; भविष्यद्वक्ता, सुसमाचार सुनाने वाले,रखवाले और उपदेशाक नियुक्त करके दे दिया जिससे पवित्र लोग सिद्ध हो जांए, सेवा का काम लिया जाए और मसीह की देह उन्नति पाए’’। (इफि.4ः11-12)
1. प्रेरित (संदेश वाहक): बाईबल में यह शब्द 300 बार आया है। प्रेरित केवल एक कलीसिया की स्थापना नहीं आया है। प्रेरित केवल एक कलीसिया की स्थापना नही करते हैं वरन एक बडे़ कलीसिया रोपण आन्दोलन का सूत्र पात करते हैं। 12 प्रेरित तो विशेष थे। आधुनिक प्रेरित, मिशनरी या कलीसिया रोपक कहलाते हैं। आजकल, पहिले के मुकाबले अधिक प्रेरित हैं और हमें और भी बहुत से चाहिये क्योंकि हमें अभी लाखों कलीसियाओं की स्थापना करना है। (इफि.2ः20)2. भविश्यद्वक्ताः परमेश्वर से सुनना और लोगों को जाकर बताना। अन्त के दिनों में परमेश्वर पिता पुरूषों, महिलाओं और बच्चों पर अपना आत्मा उण्डेल रहे हैं। एक कलीसिया बिना भविष्यद्वक्ता के गूंगी, बहरी और अन्धी है क्योंकि परमेश्वर अपने भविष्यद्वक्ताओं को बिना बताए कोई काम नही करते हैं। (प्रे.काम2ः17-18;आमोस 3ः6)
3. सुसमाचार प्रचारकः पौलूस ने बड़े बड़े चिन्हों और चमत्कारों के साथ उन स्थानों में जंहा मसीह का नाम नही लिया गया था, सुसमाचार का पूरा पूरा प्रचार किया। फिलिप्पुस सुसमाचार प्रचारक ने चिन्ह चमत्कार किए और सामरिया में हजारों को बपतिस्मा दिया। सुसमाचार प्रचार (घोषणा) विशेषकर मन परिर्वतन के अभिप्राय से प्राथमिक बात है, शिक्षा देना (समझाना,स्पष्ट करना, लागू करना) विश्वास को मजबूत करने के लिये और विश्वासियों को फलदायक बनाने के लिये है। सुसमाचार प्रचार हमेशा शिक्षा देने से पहिले होता है। (प्रे.काम8ः5-12)
4. चरवाहेः ये केवल झुण्ड की भेड़ों की ही चिन्ता नहीं करते हैं, परन्तु खोई हुई भेड़ों को बहुत प्रयत्न करके ढूढ़ लाते हैं और बचा लेते हैं जो अब तक उनके झुण्ड की भेड़े नही थी , ताकि एक ही झुण्ड और एक ही रखवाला हो जाए। (इब्रा5ः12; प्रे.काम 20ः28; यूहन्ना 10ः16)
5. शिक्षकः शिाक्षा देना ( ज्मंबी का ग्रीक यूनानी शब्द है का अर्थ है ैीववज अर्थात लक्ष्य साधना) शिक्षकों द्वारा लक्ष्य साधकर तीरों की तरह वचन से वार करना जिसके परिणाम स्वरूप पापी लोग पश्चाताप करते,बपतिस्मा लेते और उद्धार पाते हैं।

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