Skip to main content
- मूसा के द्वारा भेजे गए बारह अगुवों में से दस में आविश्वास और साहस की कमी पाई गई। उनकी सही परन्तु ऋणात्मक सूचना ने वहां सब लोगों का मनोबल गिरा दिया और वे अपनी ही दृष्टि में चिड्डे बन गए, फलस्वरूप उनके मृतक शरीर पूरे जंगल के मार्ग में बिखर गए। (गिजनी 3 अध्याय)
- शाऊल राजा ने दाऊद से से कहा, ‘‘तू तो अभी लड़का ही है’’ और उसके भाईयों ने कहा,‘‘वापस जा और अपनी भेड़ो की रखवाली कर’’ उनकी दृश्टि गोलियत पर लगी हुई थी, जबकि दाऊद की दृष्टि अपने परमेश्वर पर थी और वह उसके पहिले के अनुभवों पर आधारित थी, जो उसने सिंह और भालू के साथ लड़ाई में प्राप्त किया था और उसने गोफन के एक ही पत्थर से उस दानव गोलियात को मार डाला। सही दिखाई देने वाले लेकिन ऋणात्मक समझ वाले शिकायत कर्ताक्रताओं से अलग रहिये। (1शमूएल 16ः36)
- अधिकांश मसीहियों को गवादी देने मे डर महसूस होता है, कि क्या मालूम उन्हें शर्मिन्दा होना पड़े, अपमानित होना पडे़ या सताव झेलना पडे़। यह इसलिये है कि उनकी कलीसिया ने उन्हें नहीं सिखाया कि उन अविश्वासियों कैसे बात करना है, जहां उनके लिये और खोए हुओं के लिये भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। (यहेजकेल 3ः18-19)
- फरीसियों ने प्रभु येशुआ को डराने की कोशिश की थी कि हेरोदेश राजा तुझे मार डालने की योजना बना रहा है। प्रभु येशुआ ने कहा,‘‘जाकर उस लोमड़ी से कह दो...... कि मैं आज और कल और परसों चंगाई करूंगा और मुझे चलना आवश्यक है’’। (लूका 13ः32-33)
- ‘‘और वह (पौलूस) आराधनालय में जाकर तीन महीने तक निडर होकर बोलता रहा और परमेश्वर के राज्य के विषय में वाद विवाद करता, और समझाता रहा’’। बाद में वह तरन्नुम की पाठशाला में अन्य जातियों से वाद विवाद करता रहा। पौलूस अपने चेंले को स्वंय करके दिखाता रहा कि शत्रुता की भावना रखने वाले यहूदियों और अन्यजातियों से कैसे हियाव के साथ बातचीत करना चाहिए और साथ साथ चंगाई और छुटकारे की सेवा भी करते जाना है। बहुत जल्दी एशिया के सारे शहरों में कलीसियांए स्थापित हो गईः इफिसिया, स्मुरना, परगमोस, थाईतीरा, फिलाडेल्फिया और लौदीकिया में (प्रे.काम.19ः8-12; प्रका.वा.1ः11)
- जब चेलों को बन्दीग्रह में डाले जाने और सताव की धमकियां मिलने लगीं तब उन्होंने हियाव और साहस के लिये प्रार्थनांए की।‘‘अब हे प्रभु उनकी धमकियो को देख और अपने दासों को यह वरदान दे, कि तेरा वचन बडे़ हियाव से सुनांए’’। (प्रे.कामसही 4ः29)
- निडरता व हियाव रखने के लिये बाईबल के बडे़ ज्ञाता होने की आवश्यकता नहीं है,‘‘जब उन्होंने पतरस और यूहन्ना का हियाव देखा और यह जाना कि ये अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं तो अचम्भा किया, फिर उनको पहिचाना कि ये यीशु के साथ रहे हैं। (प्रे.काम 4ः13)
- भविबोशत के समान बनने से अपने को चैकस रखें व बचाए रखें। उसके नाम का अर्थ है,‘‘शर्मनाक वस्तु’’ और उसने अपने आपको एक ‘‘मरा कुत्ता’’ कहा यद्यपि वह तो योनातन का बेटा था और राजा शाऊल का पोता था। इससे भी खराब बात यह है कि वह ‘‘लोदबार’’(Loderbar) नगर का रहने वाला था जिसका अर्थ है ‘‘कुछ भी नही’’। वह एक ‘‘कुछ भी नही’’ था और कहीं से भी नहीं था। दाऊद ने उसे अपनी दयालुता के अनुसार उसे राजा की मेज पर भोजन करने के लिए आमंत्रित किया। (2शमू.9ः4-8)
- कालिव और यहोशू भी दास थे, ‘‘ परन्तु उनमें अलग ही प्रकार की आत्मा थी। ‘‘ इस कारण कि मेरे दास कालिब के साथ और ही आत्मा है’’। ‘‘न तो बल से न शक्ति से परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है’’। (गिनती 14ः24; जकर्याह 4ः6)
- जब आशारहित होकर चारों तरफ से शत्रुओं सेे घिर गए थे तब एलिशा ने प्रार्थना किया और जवान गेहजी ने देखा कि एलीशा के चारों ओर के पहाड़ अग्निमय घोड़ो और रथों से भरे हुए हैं’’। ‘‘क्योंकि जो तुसमें है वह उससे जो संसार में है, बड़ा है’’। ‘‘यदि परमेश्वर हमारी ओर है तो हमारी विरोधी कौन हो सकता है?’’ (2राजा 6ः16; 1यूहन्ना 4ः4; रोमियों 8ः31)
- पौलूस प्रेरित ने वचन प्रचार के लिये बोलने और मुंह को हियाव के साथ खोलने के लिये प्रर्थना किया। प्रार्थना कीजिये और फिर हियाव के साथ और बुद्धिमानी के साथ जो कुछ परमेश्वर ने आपके मन में दिया है बांटिये और राजाओं के राजा के ब्याह के भोज में शामिल होने के लिये आंमत्रित हो जाईये। (प्रका.वा.19ः6-9; इफि.6ः19; कुलु. 4ः5-6)
Comments
Post a Comment