एक आज्ञाकारी शिष्य (चेला) कौन है?

 एक आज्ञाकारी शिष्य (चेला) कौन है?

  1. चेला आज्ञाकारी व स्वतंत्र होता हैः ‘‘यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे तो सचमुच् मेरे चेले ठहरोगे और सत्य को जानोगे और सत्य तुम्हे स्वतंत्र करेगा’’। वह आपको चर्च संगठनों और रीति रिवाजों से भी स्वतंत्र करेगा। स्वतंत्रता यह नहीं है कि हम अपनी ही इच्छा के अनुसार करें परन्तु यह है कि हम परमेश्वर की इच्छा पूरी करें। (गलतियों5ः13-14;यूहन्ना8ः31-32;कुलु.2ः8)
  2. चेले कुशल ‘‘मनुष्यों के मछुवारे’’ होते हैः येशुआ ने सर्वप्रथम नये विश्वासियों को अपने पीछे हो लेने के लिये बुलाया। जब वे प्रशिक्षण ले रहे थे उन्होंने उन्हें चेले कहा परन्तु जब वे मनुष्यों के मछुवारों के रूप में बाहर जाने लगे तो प्रभु ने उन्हें प्रेरित कहा। यहां स्तर में निश्निचित अंतर हैः एक विश्वासी से अनुयाई फिर चेला और फिर प्रेरित। (मत्ती9ः19;10ः12; मरकुस 1ः17; मरकुस 3ः14;6ः30;लूका5ः10;6ः1,13)
  3. प्रभु येशुआ ने कहे, ‘‘मेरे पिता की महिमा इसी से होती है कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे तुमने मुझे नहीं चुना परन्तु मैंने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे’’। हम हमारी धार्मिकता के द्वारा नहीं जाने जांएगे परन्तु अपने फलों के द्वारा जाने जाएंगे। (यूहन्ना15ः8,16;मत्ती 7ः16; यशा. 64ः6)
  4. चेलों के पास अधिकार होता है कि वे शत्रु की सारी सामर्थ को बांधे और खोलें। चेले बलवंत के गढ़ो के ध्वस्त करते हैं और कटनी को खत्ते में इकट्ठा करते हैं। (लूका 10ः19;मत्ती 12ः29-30;18ः18)
  5. चेले परंपराओं अर्थात रीति रिवाजों को तोड़ते है: जब चर्च की रीति रिवाज और परम्पराएं परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करती हैं, तब वे परमेश्वर की आज्ञाएँ  मानते हैं। (मत्ती 15ः1-8;प्रे.काम4ः यर्मियाह1ः5-10)
  6. चेले, येशुआ को किसी और से अधिक प्रेम करते हैंः यदि कोई मेरे पास आए और अपने पिता और माता और पत्नी और लड़के बालों और भाईयों और बहिनों बरन अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता। (लूका14ः26,मत्ती6ः33;19ः21)
  7. चेले कीमत चुकाने के लिये तैयार रहते हैंः और जो कोई अपना क्रूस न उठाए और मेरे पिछे न आए वह भीे मेरा चेला नही हो सकता।’’ ‘‘इसी रीति से तुममें से जो  कोई अपना सब कुछ त्याग न दे तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता।’’ (लूका14ः26,33)
  8. चेले, एक दूसरे से प्रेम रखते हैः प्रभु येशुआ ने आज्ञा दी कि, ‘‘एक दूसरे से प्रेम रखोः जैसा मैंने तुमसे प्रेम रखा वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो,यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसीसे सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो। (यूहन्ना13ः34-35)
  9. चेले, पर्यावरण की देखभाल करते हैंः प्रभु येशुआ ने केवल आत्माओं को बचाने के लिये ही अपने प्राण नहीं दिये परन्तु पूरी सृष्टि का परमेश्वर से मेलमिलाप कराने के लिये, जो आहें भर रही है और बड़ी लालसा के साथ परमेश्वर के पुत्रों के प्रकट होने की बाट देख रही है कि वे आकर परमेश्वर की सृष्टि की देखभाल करें। (कुलु.1ः20;रोमियों8ः14-23;2कुरि.5ः17-19) आकर्षित करने वाली कलीसिया स्थापित करने से बचें (ऐसी कलीसियांए जो उन्हें भेजने के बदले उन्हें चिपका कर रखती हैं। (प्रे.काम16ः3-5;2तीमु.2ः2; कुलु.2ः1)
  10. चेले,प्रभु येशुआ से भी बडे़ काम करेगेः प्रभु येशुआ ने बीमारों को चंगा किए, दुष्टात्माओं को निकाले, मुर्दो को जीवित किए और सुसमाचार प्रचार किए। उन्होंने कटनी को खत्ते में जमा करने के महान कार्य को अपने चेलों के लिये छोड़ दिया है। (यूहन्ना14ः6)
  11. चेले, पृथ्वी पर शासन करते हैंः प्रभु येशुआ ने मरकर हमें पृथ्वी पर शासन करने के लिये राजा और याजक बनाए हैं। मध्यस्थता की प्रार्थनाओं और दयालुता के कार्यों के द्वारा हम टूटे और पिसे हुए मन के लोगों के जीवन को बनाते हैं और पृथ्वी पर शासन करते हैं। (प्रका.वा.5ः10;यशा.58ः6-12;मत्ती25ः31-48)
  12. चेले अर्थात सीखने वाले बनाने से ही काम समाप्त नहीं हो जाता परन्तु उन्हें परिपक्व होकर पवित्र भक्तों के स्तर पर आना होगा जो बहुत से चेला बनाने वालों, उन्हें आत्मिक तैयारी देने वालों और उन्हें सेवा हेतु भेजने वालों की पीढ़ियों को जन्म देते है। (मत्ती28ः19;इफि.4ः12;2तीमु2ः2)

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