महान आदेश

महान आदेश 
  1. प्रभु येशुआ का अन्तिम आदेश: ‘‘इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को (16,750 मानव समुदाय ; और 6909 भाषाएं बोली जाती हैं) चेला बनाओ, उन्हें बपतिस्मा दो और उन्हें सब बातें जो मैने तुम्हें आज्ञा दी हैं, मानना सिखाओं’’। (मत्ती 28ः18-19)
  2. भेजने वाला: प्रभु येशुआ स्वयं हमारे भेजने वालें हैं, जिनके पास स्वर्ग और पृथ्वी के सारे अधिकार हैं। उन्होंने हमें उसी अधिकार के साथ सारी जातियों के लोगों को चेला बनाने के लिये भेजा है। महान आदेश, विश्वासियों के साथ एक वाचा है  जिस पर स्वयं उनके रक्त्त की मुहर लगी हुई है, जो कि नई वाचा का चिन्ह है। (इब्रा.13ः20,21)
  3. जाओः महान आदेश, जाने के लिये दिया गया एक ‘‘नियुक्त्ति पत्र’’ है। येशुआ ने कहे, मुझे आज, कल और परसों चलना आवश्य है, ताकि जाकर बीमारों को चंगा करूं, दुष्टात्माओं को निकालूं और राज्य का सुसमाचार प्रचार करूं। उनकी कलीसिया ‘‘जाने वाली कलीसिया’’ है और महान आदेश उनके तुरन्त आज्ञा पालन का आदेश है। ‘‘मुझ पर हाय, यदि मैं समय असमय सुसमाचार प्रचार न करूं, अपने पड़ौस से लेकर दुनिया की छोर तक। (प्रे.काम1ः8; 1कुरि.916; लूका4ः43; 13ः31ः33; तीमु.4ः2; यशा.6ः8)
  4. चेले बनाओः महान आदेश कलीसिया की सबसे महत्वपूर्ण व प्रमुख कार्य योजना है। बाकी तो सब विवरण हैं। महान आदेश, बड़ी संख्या में चेले बनाने वालों, बपतिस्मा देने वालों तथा उन्हें पूरी तरह से आत्मिक सुसज्जा देकर भेजने वालों को, पैदा करने की आज्ञा है। परमेश्वर को महिमा देने का सबसे अच्छा तरीका है, कि हम अधिक संख्या में चेले बनाने वाले बनांए। (प्रे.काम28ः28; तीमु2ः2; यूहन्ना 15ः8)
  5. बपतिस्मा दोः बपतिस्मा में हम एक पापी की हैसियत से तो मर जाते है परन्तु संन्तों के समान जी उठते हैं। जो विश्वास करते और बपतिस्मा लेते हैं वे उद्धार पांएगे। केवल विश्वासियों का बपपिस्मा ही वैध है। विश्वासियों में ये चिन्ह होंगे; ‘‘वे दुष्ट आत्माओं को निकालेंगे...... बीमारों के लिये प्रार्थना करेंगे और वे चंगे हो जाएंगे’’। सभी विश्वासी राजकीय याजक हैं, और यह वे मेम्ने के लोहू द्वारा बनाए गए हैं, सब विश्वासी बपतिस्मा दे सकते हैं और महान आदेश को पूरा कर सकते हैं। (मरकुस16ः15-18; 1पत.2ः9; प्रका.वा.5ः9,10)
  6. जो जो आज्ञाएं मैंने तुम्हें दी हैं उन्हें मानो और सिखाओः महान आदेश प्रति रविवार गिरजाघर जाने के लिये नहीं है ( जिसके लिये बाईबल में एक भी पद नहीं है) परन्तु यह एक दूसरे से प्रेम रखने के लिये है, यहाँ तक कि अपने बैरियों से भी । यह आदेश शिष्य बनाने के लिये है। जहां कहीं भी प्रभु ने आपको रखा है, घर, आफिस, काम की जगह या बाजार में और फिर उन्हें जल्दी से जल्दी जहां भी सम्भव हो बपतिस्मा दें (जहां भी सब कुछ सुलभ हो)। और तब उन्हें आज्ञा मानना सिखांए, यह सब हमारी 24x7x365 की दिन चर्या होनी चाहिये। ‘‘ यदि तुम मुझसे प्रेम रखते हो तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे’’। (यूहन्ना 13ः34,35;14ः15; मत्ती 5ः43-48; प्रे.काम1ः8; याकूब4ः17)
  7. कार्यकर्ताओं को आत्मिक रीति से पूरी तैयारी दें और सेवा के लिये भेज देंः प्रभु येशुआ ने बारह साधारण लोगों को पूरी आत्मिक तैयारी दिये और उन्हें आशीष देकर कहा ‘‘जैसे पिता ने मुझे भेजा है, मैं भी तुम्हें भेजता हूं’’। दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी, मुखाग्र संस्कृति वाली है, और सेवकों को उनकी मन की भाषा में कहानी बतानें वालों की तरह तैयार करके भेजना होगा। (यूहन्ना 20ः21;प्रे.काम 2ः8-18;मरकुस4ः34;रोमियों10ः11-16)
  8. महान आदेशकी आज्ञाः नये नियम की प्रथम पांच पुस्तकों में दी गई है; जाति और जन समुदायों को सुसमाचार प्रचार का आदेष (मत्ती28ः18-20),पश्चाताप (मन फिराव) का आदेश (लूका 24ः46), सेवा के लिये भेजने का आदेश (यूहन्ना20ः21) भूगौलिक आदेश (प्रे.काम1ः8)। महान आदेश, विकल्प चुनने के लिये ‘‘बड़ा सम्भव’’ नही है, परन्तु यह हमारे विश्वास को क्रियाशील बनाने की सुस्पष्ट नियुक्ति है।
  9. विश्व भर में अनगिनत बाईबल स्कूलः लोखों लाख ‘‘मछलीघर रक्षको’’ को तैयार कर रहे हैं, जबकि 41,000 से अधिक ईसाई धार्मिक समूहों और 4600 मिशनों ने दूरस्थ अंचलों में जाकर मछली पकड़ने के दर्शन को खो दिया है। वे कांच के घर में सुनहली मछलियों की देखभाल करने में बहुत खुश हैं, बनिस्बत इसके कि ऐसे स्थानों में जाकर मछली पकडे़ं, जहां कलीसिया का वजूद नहीं है। क्या इस प्रकार वे बचाए जाकर परमेश्वर के सिंहासन के सामने आंए और आराधना करें। (प्रका.7ः9-10)

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