मार्ग दर्शन और अगुवाई करना

मार्ग दर्शन और अगुवाई करना

‘‘फिर उसने अपने दास दाऊद को चुनकर, भेड़शालाओं में से ले लिया; वह उसको बच्चे वाली भेंड़ों के पीछे फिरने से ले आया, कि वह उसकी प्रजा याकूब कीः अर्थात  उसके निज भाग इस्त्राएल की चरवाही करे। तब उसने खरे मन से उनकी चरवाही की और अपने हाथों की कुशलता से उनकी अगुवाई की’’। (भजन संहिता 78ः70-72


1. अगुवे परमेश्वर की ओर से चुने जाते हैं :- उनके शैक्षिक ज्ञाने के आधार पर नहीं; परन्तु परमेश्वर के अभिप्राय के अनुसार। ‘‘तुमने मुझे नहीं चुना परन्तु मैंने तुम्हें चुना और ठहराया ताकि तुम जाकर बहुतायत के साथ अनन्त काल तक ठहरने वाले फल लाओ’’। (यूहन्ना15ः5,8,16)

2. रणनीतिकः- दाऊद के पास बहुत से मजदूर थे, जिन्हें उसने दूसरी भेड़ों की देखभाल करने का काम सौंप दिया परन्तु बच्चों वाली भेड़ों की देखभाल वह स्वयं करता था क्योंकि वे उसके झुण्ड की उत्पादन बढ़ाने वाली मुख्य कारक थी। अपने समय और संसाधनों को निश्क्रिय लोगों पर बरबाद न करें परन्तु आन्दोलनों के उत्प्रेरकों पर खर्च कीजिये। यदि मूसा ने यहोशू को तैयार नहीं किया होता तो इस्त्राएली अब तक जंगल में भटकते रहते।

3. परमेश्वर की मीरास में गुणात्मक वृद्धि कीजियेः- उद्धार पाए हुए लोग परमेश्वर की मीरास हैं। परमेश्वर उन अगुवों में बहुत अधिक रूचि लेते हैं जो भेड़ों के वंश उत्पादन, उनका पालन पोशन और परमेश्वर की मीरास की गुणात्मक वृद्धि के लिये समर्पित हैं। (मलाकी 3ः16-18;भजन संहिता 33ः12)

4. खराई का पीछा करोः- बाईबल के अनुसार अगुओं को इस शिक्षा की आवश्यक है कि वे,‘‘अपने में से सात सुनाम पुरूशों को जो पवित्रात्मा और बुद्धि से परिपूर्ण  हों, चुन लो कि हम उन्हें इस काम पर ठहरा दें’’। ऐसा करने के द्वारा कलीसिया बहुत तेज़ी से वृद्धि करने लगी। (प्रे.काम 6ः3-7)

5. निपुणताः- शिष्य बनाने के आन्दोलन को आग का रूप देने के लिये केवल ज्ञान की ही आवश्यकता नही हैं। परन्तु इसमें व्यवसायिक उद्यम की तरह क्रियाशील और उत्पादन में वृद्धि करने वाले अगुवों को पैदा करने की जरूरत है,चाहे उनके पास कैसे भी संसाधन क्यों न हों। दाऊद के पास तो केवल एक गोफन थी।

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